Date : 2022-05-11
वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत का अपने पति की लम्बी आयु और सुखी जीवन के लिए स्त्रियों द्वारा रखा जाता है। उत्तर भारत में हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को यह व्रत रखने की परंपरा होती है। जबकि दक्षिण भारत के राज्यों में 15 दिन बाद अर्थात ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। हिन्दू धर्म के अनुसार बरगद के पेड़ में सभी देवी देवताओं का वास होता है। वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन स्त्रियां बरगद के वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करती हैं और उस पर कच्चा सूत का धागा लपेटती हैं। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है।
वट सावित्री व्रत का महत्व
सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि का बहुत ही विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सावित्री के पति सत्यवान को वट वृक्ष के नीचे जीवनदान मिला था इसलिए इस दिन को वट पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस व्रत को करने से महिलाओ को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
वट सावित्री व्रत की पूजन सामग्री
वट सावित्री व्रत के लिए बांस की लकड़ी से बना पंखा, चावल, हल्दी, धूपबत्ती, लाल पीले रंग का कलावा, सोलह श्रंगार, तांबे के लोटे में पानी, पूजा के लिए सिंदूर और लाल रंग का वस्त्र पूजा में बिछाने के लिए, पांच प्रकार के फल और पकवान का की आवश्यकता होती है पकवान घर पर बना ले। वट वृक्ष की पूजा में इन सभी चीजों का इस्तेमाल पूरे विधि विधान से करें।
कैसे करे वट सावित्री व्रत में पूजा
- सुबह उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करे।
- वट सावित्री व्रत की पूजा बरगद अर्थात वट वृक्ष के नीचे की जाती है।
- बरगद के पेड़ पर लोटे में भरकर जल चढ़ाए।
- इसके बाद बरगद के पेड़ की परिक्रमा करके कलावा बरगद के पेड़ पर लपेटना है।
- पूजा करने के बाद सत्यवान और सावित्री की कथा पड़नी है।
वट सावित्री के व्रत में क्या खाए।
वट सावित्री व्रत में आम, चना, पूरी, खरबूजा, गुलगुला पुआ इस सभी चीजों से वट वृक्ष की पूजा की जाती हैं और जब व्रत पूर्ण हो जाता है तब इन्ही चीजों को वट सावित्री व्रत में खाया जाता हैं
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा
2021-02-11
2021-02-12
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