शनि देव की आरती

Date : 2023-04-09

शनि देव की आरती



जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥


शनि देव के मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनेश्चराय नमः।


शनि गायत्री मंत्र

ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्। ऊँ श्रां श्रीं श्रूं शनैश्चाराय नमः। ऊँ हलृशं शनिदेवाय नमः।


शनि के दान

शनिवार के दिन चींटियों को आटा और काले तिल मिलाकर खिलाए। शनिवार के दिन काली साबुत उड़द का दान शनि मंदिर में करे।


शनि का रत्न

शनि का रत्न नीलम होता है।


नीलम का उपरत्न कौन सा होता है

नीलम का उपरत्न नीली होता है।



ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा
 
 

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