Date : 2022-07-09
सावन कांवड़ यात्रा
सावन का महीना 14 जुलाई 2022 से शुरू हो रहा है। इस महीने शंकर भगवान की पूजा की जाती है। सावन के महीने में शंकर भगवान की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दौरान महिलाएं भी अच्छे वैवाहिक जीवन की लिए शंकर भगवान का व्रत करती है और कुंवारी लड़किया भी अच्छा जीवन साथी प्राप्त करने के लिए शंकर भगवान का व्रत करती है। सावन के महीने में कांवड़ भी लाई जाती है। सावन के महीने शिव भक्त गंगा नदी से जल लेकर आते है और शंकर भगवान का अभिषेक करते है। इससे भगवान शंकर प्रसन्न होते है और अपने भक्तो की मनोकामनाए पूरी करते है।
कांवड़ यात्रा का महत्व
कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्त गंगा नदी से पवित्र जल भरते हैं और लंबी यात्रा करके शिव जी को जल अर्पित करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते हैं। कांवड़ यात्रा करने वाले भक्त कांवड़िया कहलाते हैं। कहा जाता है कि इससे महादेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर कामना को पूरा करते हैं। इसलिए शिव भक्त सावन के महीने में कांवड़ यात्रा निकालते है।
कांवड़ यात्रा के नियम
- कांवड़ यात्रा पैदल की जाती है।
- यात्रा के दौरान कांवड़ियों को सात्विक भोजन करना होता है।
- मांसाहार और शराब आदि के सेवन से बचना होता है।
- कांवड़ रास्ते में कहीं भी ज़मीन पर नहीं रखी जाती है।
- आराम करते समय कांवड़ को पेड़ पर लटकाना होता है।
- कांवड़ यात्रा के दौरान आपने जिस मंदिर में अभिषेक करने का संकल्प लिया है उस मंदिर तक आपको पैदल चल कर जाना होता है।
कैसे हुई कांवड़ यात्रा की शुरुवात
मान्यता है की श्रवण कुमार त्रेता युग में माता पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार ले गए थे और वहां जाकर उन्होंने माता पिता को गंगा में स्नान करवाया और वापस लौटते समय श्रवण कुमार गंगाजल लेकर आए और उन्होंने व उनके माता पिता ने इस जल को शिवलिंग पर चढ़ाया। तभी से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई।
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा
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