Date : 2023-05-10
संतान प्राप्ति में देरी के कारण
● कुंडली में पांचवा स्थान संतान का होता है। अगर कुंडली में पांचवे स्थान में शनि बैठा हो या शनि की दृष्टि पांचवे स्थान पर हो तो संतान प्राप्ति में देरी होती है। इसके उपाय करने चाहिए।
● कुंडली में पांचवे स्थान के मालिक ग्रह पर शनि की दृष्टि होगी तो भी संतान प्राप्ति में देरी की स्थिति बनती है इसलिए इसके उपाय करने चाहिए।
● कुंडली में पांचवे स्थान का मालिक ग्रह यदि शनि के नक्षत्र में होगा तो भी संतान प्राप्ति में देरी की स्थिति बनेगी। इसके उपाय करने से संतान प्राप्ति में आने वाली रूकावट दूर हो जाती है और संतान सुख प्राप्त हो जाता है।
● बृहस्पति ग्रह भी संतान के कारक होते है अगर कुंडली में बृहस्पति ग्रह नीच का होगा या पाप ग्रह शनि राहु केतु से किसी भी प्रकार से पीड़ित होगा तो भी संतान प्राप्ति में देरी की स्थिति बनेगी। संतान प्राप्ति में विलम्ब होगा।
● कुंडली में पांचवे स्थान पर राहु की दृष्टि होगी तो भी संतान प्राप्ति में देरी की स्थिति बनेगी। इसलिए इसके उपाय करने चाहिए। उपाय करने से संतान प्राप्ति की रूकावट दूर हो जाती है और संतान सुख प्राप्त हो जाता है।
● कुंडली में पांचवे स्थान के मालिक ग्रह पर यदि राहु का प्रभाव होगा या राहु पांचवे स्थान के मालिक के साथ बैठा होगा तो भी संतान प्राप्ति में देरी की स्थिति का निर्माण होगा।
● कुंडली में दूसरा स्थान वंश वृद्धि का होता है यदि कुंडली में दूसरे स्थान में केतु बैठा होगा तो संतान प्राप्ति में देरी होगी। वंश वृद्धि में देरी होगी। परिवार बढ़ने में देरी होगी।
● कुंडली में दूसरा स्थान वंश वृद्धि का होता है यदि कुंडली में दूसरे स्थान में शनि बैठा होगा तो संतान प्राप्ति में देरी होगी और वंश वृद्धि देर से होगी। परिवार बढ़ने में देरी का सामना करना पड़ेगा।
● कुंडली में दूसरे स्थान पर शनि की दृष्टि होने से भी संतान प्राप्ति में देरी होती है। इसलिए इसके उपाय करने चाहिए। उपाय करने से संतान प्राप्ति की रूकावट दूर हो जाती है और संतान सुख समय पर प्राप्त हो जाता है।
● कुंडली में पंचम भाव का मालिक यदि छठे, आठवे या बारवे स्थान में होता है तो इस स्थिति में भी संतान प्राप्ति में देरी होती है संतान सुख प्राप्त होने में विलम्ब की स्थिति बनती है इसलिए इसके उपाय करने चाहिए।
संतान प्राप्ति के सरल उपाय● संतान प्राप्ति के लिए संतान गोपाल मंत्र का जपा करे ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते । देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।
● संतान प्राप्ति के लिए अपनी कुंडली के पांचवे स्थान के मालिक ग्रह का रत्न धारण करे और उसके जाप करे। इससे संतान सुख प्राप्त होता है।
● संतान प्राप्ति के लिए प्रत्येक वीरवार व्रत करे और प्रतिदिन सुबह बृहस्पति के मंत्र की एक माला का जाप जरूर करे ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः।
● संतान प्राप्ति के लिए ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर पुखराज रत्न धारण करे। इससे भी संतान प्राप्ति के योग बन जाते है और संतान सुख प्राप्त हो जाता है।
● संतान प्राप्ति के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष भी धारण करे। इससे भी संतान सुख प्राप्त होने के योग बन जाते है।
● संतान प्राप्ति में आ रही रूकावट को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुबह पक्षियों को सतनाज खिलाए। इससे राहु केतु ग्रहो की शांति होती है।
● संतान प्राप्ति में यदि शनि ग्रह के कारण रूकावट आ रही है तो प्रतिदिन शाम को शनि के मंत्र की एक माला का जाप जरूर करे ॐ प्रां प्रीं प्रों सः शनेश्चराय नमः। प्रत्येक शनिवार शनि देव पर सरसो का तेल चढ़ाए। 21 शनिवार शनि मंदिर में काली साबुत उड़द का दान करे।
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा