नीम करोली बाबा की कहानी

Date : 2023-03-28

नीम करोली बाबा की कहानी



नीम करोली बाबा का जन्म उत्तरप्रदेश के अकबरपुर गांव में उनका जन्म 1900 के आसपास हुआ था। 17 वर्ष की उम्र में ही उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी। उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था। 11 वर्ष की उम्र में ही बाबा का विवाह हो गया था। 1958 में बाबा ने अपने घर को त्याग दिया और पूरे उत्तर भारत में साधुओं की तरह जीवन व्यापन किया। नीम करोली बाबा हनुमान जी के भक्त थे उन्होंने 108 मंदिर बनवाए। नीम करौली ने नैनीताल के पास कैंची आश्रम की स्थापना 1964 में की थी। नीम करोली बाबा के भक्तों में एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्क और हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स का नाम लिया जाता है। इस धाम की यात्रा करके उनका जीवन बदल गया और उन्हें तरक्की के शिखर को छुआ। बाबा नीम करौली महाराज के दो पुत्र और एक पुत्री हैं। रिचर्ड एलपर्ट ने नीम करोली बाबा के चमत्कारों पर 'मिरेकल ऑफ़ लव' नामक एक किताब लिखी। नीम करोली बाबा ने अपने शरीर का त्याग 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में किया था।


नीलम करोली बाबा के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न : कैंची धाम कब जाना चाहिए ?

उत्तर : कैंची धाम प्रत्येक वर्ष की 15 जून को यहां पर बहुत बडे मेले का आयोजन होता है। जिसमें देश-विदेश के श्रद्धालु भाग लेते हैं ।

प्रश्न : नीम करौली बाबा के गुरु कौन थे ?

उत्तर : भगवान हनुमान के थे भक्त बाबा नीम करोली बाबा।

प्रश्न : नीम करोली बाबा ने कब समाधि ली ?

उत्तर : 11 सितंबर 1973 को नीम करोली बाबा ने समाधि ले ली थी।

प्रश्न : नीम करोली बाबा की समाधि कहाँ है ?

उत्तर : नीम करोली बाबा का समाधि स्थल नैनीताल के पास पंतनगर में है।

प्रश्न : बाबा नील करोली की शादी हुई थी ?

उत्तर : बाबर नीम करोली की शादी हुई थी।

प्रश्न : नीम करोली बाबा आश्रम कौन चलाता है ?

उत्तर : बाबा की शिष्या श्री माँ अब आश्रम की देखभाल करती हैं।


नीम करोली बाबा के चमत्कार

शिप्रा नदी के जल को बना दिया घी

एक दिन कैंची धाम में भंडारा चल रहा था लेकिन घी कम पड़ गया। बाबा के शिष्यों ने ये बात बाबा को बताई की घी कम पड़ गया है बाबा ने कहा शिप्रा नदी का जल घी से कम कम है क्या। भोजन में शिप्रा नदी का जल इस्तेमाल करे। उनके शिष्यों ने ऐसा ही किया। उनके शिष्य शिप्रा नदी से जल लाए और भोजन में घी की जगह शिप्रा नदी का जल इस्तेमाल किया और जल घी में परिवर्तित हो गया है।


बाबा ने रोकी बारिश

हनुमानगढ़ी मन्दिर के निर्माण कार्य के दौरान एक दिन भारी बारिश होने लगी। जो रुकने का नाम नहीं ले रही थी। बाबा ने आसमान की और मुँह करके कहा 'पवन तनय बल' इतना कहते ही आसमान से सारे बादल साफ़ हो गए और बारिश रुक गई।

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