मंगल-केतु युति और अंगारक दोष: जानिए इसके प्रभाव और समाधान

Date : 2025-09-30

मंगल-केतु युति और अंगारक दोष: जानिए इसके प्रभाव और समाधान

 

मंगल, केतु और अंगारक दोष – एक ज्योतिषीय दृष्टिकोण

भारतीय वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का विशेष महत्व है। हर ग्रह की अपनी ऊर्जा, प्रभाव और विशेषताएं होती हैं। जब कुछ ग्रह विशेष स्थितियों में एक-दूसरे के साथ युति (conjunction) या दृष्टि (aspect) में आते हैं, तो कुछ दोष उत्पन्न होते हैं, जो जातक के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसा ही एक प्रमुख दोष है –अंगारक दोष, जो मुख्यतः मंगल और केतु की युति से बनता है।


क्या होता है अंगारक दोष?

जब कुंडली में मंगल और केतु एक ही भाव (घर) में स्थित होते हैं तब अंगारक दोष बनता है। अंगारक शब्द का अर्थ है 'अग्नि समान' या 'ज्वलनशील', और इस दोष का नाम भी इसी कारण पड़ा है क्योंकि यह दोष जातक के जीवन में उग्रता, क्रोध, संघर्ष और मानसिक अशांति को जन्म देता है।


अंगारक दोष के संभावित प्रभाव:

1. क्रोध की अधिकता: जातक बहुत जल्दी गुस्सा करता है और कभी-कभी नियंत्रण से बाहर हो सकता है।
2. दुर्घटनाओं की संभावना: विशेषकर वाहन दुर्घटनाएं, आग लगना या चोट लगने की स्थिति बनती है।
3. कानूनी समस्याएं: पुलिस केस, झगड़े या कोर्ट-कचहरी से जुड़ी परेशानियां।
4. मानसिक तनाव: नींद न आना, बेचैनी, डर और चिंता का अनुभव होना।
5. पारिवारिक कलह: घरेलू शांति भंग होना, माता-पिता या जीवनसाथी से मतभेद।
6. आर्थिक हानि: गलत निर्णयों के कारण धन की हानि होना।

तो यह दोष और भी अधिक प्रभावी हो सकता है। इसके लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली का विश्लेषण कराना आवश्यक होता है।

अंगारक दोष के उपाय:

यदि कुंडली में अंगारक दोष हो, तो कुछ उपायों से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है:

1. हनुमान जी की उपासना : हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और लाल चोला चढ़ाएं।
2. मंगल और केतु का शांति पूजन : विशेष पूजा या हवन ज्योतिषीय मार्गदर्शन में कराना लाभदायक होता है।
3. ग्रहों के मंत्र का जाप: मंगल मंत्र: "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः केतु मंत्र: ॐ कें केतवे नमः
4. दान करना : मंगलवार को मसूर दाल, लाल वस्त्र, तांबा आदि का दान करें।
5. रत्न पहनना : कुछ मामलों में मूंगा (मंगल के लिए) और लहसुनिया (केतु के लिए) धारण करने की सलाह दी जाती है, लेकिन केवल कुंडली देखकर।

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