क्या होता है पितृ दोष और कुंडली में पितृ दोष को कैसे पहचाने और पितृ दोष से बचने के उपाय

Date : 2022-02-12

क्या होता है पितृ दोष और कुंडली में पितृ दोष को कैसे पहचाने और पितृ दोष से बचने के उपाय

पितृ दोष क्या होता है

कुंडली में जब राहु या केतु लग्न, तीसरे, चौथे, पांचवे या सातवे स्थान में होते है तो कुंडली में पितृ दोष का निर्माण होता है। कुंडली के जिन भावो से पितृ दोष बनता है उन भावो से जुड़े शुभ फल में कमी रहती है और उन भावो से सम्बंधित समस्या भी होती है।

क्यों होता है पितृ दोष

अगर पिछले जन्म में गलत कर्म किये गए हो या गुरु या माता पिता का अपमान क्या गया हो तो पितृ दोष बनता है इसके कारण जीवन में अनेक परेशानी झेलनी पड़ती है। जीवन में सफलता प्राप्त होने में रूकावट रहती है वंश वृद्धि होने के रूकावट रहती है। परिवार में समस्याए गलती रहती है शादी में देरी होती है।

पितृ दोष के लक्षण या दुष्प्रभाव

अगर पितृ दोष लग्न में राहु के बैठने से बनता है तो स्वास्थ्य खराब रहता है अगर पितृ दोष तीसरे स्थान से बनता है तो बहन भाइयो के सुख में कमी रहती है और भाग्य में रूकावट रहती है भाग्य का साथ प्राप्त नहीं होता है प्रत्येक कार्य में रूकावट रहती है मेहनत के अनुसार फल की प्रति नहीं होती है। अगर कुंडली में पितृ दोष चौथे स्थान से बनता है प्रॉपर्टी सुख में कमी रहती है माता को कष्ट होता है मन परेशान रहता है कार्य क्षेत्र में तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है मान सम्मान प्राप्त होने में रूकावट रहती है। अगर कुंडली में पंचम भाव से पितृ दोष बनता है तो संतान सुख देर से प्राप्त होता है वंश वृद्धि में रूकावट रहती है। पढ़ाई पूरी होने में रूकावट रहती है मित्रो से धोखा प्राप्त होता है धन लाभ में कमी रहती है। अगर कुंडली में पितृ दोष सप्तम भाव से बनता है तो शादी में देरी होती है अच्छे घर से रिश्ता नहीं हो पाता है और शादी के बाद पति पत्नी के बीच परेशानी रहती है।

पितृ दोष शांति के लिए पूजा

पितृ दोष की शांति के लिए सवा लाख पितृ गायत्री मंत्र का जाप करवाना चाहिए। घर में ब्राह्मण को बुलाकर सवा लाख पितृ गायत्री मंत्र का जाप करवाना चाहिए। इस पूजा में परिवार के प्रत्येक सदस्य को बैठना चाहिए और ये पूजा परिवार के गोत्र को संकल्प करके की जाती है। पितृ गायत्री मंत्र है : ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।

पितृ गायत्री मंत्र से होने वाले लाभ

1 पितृ गायत्री से वंश वृद्धि होती है
2 इस पूजा को करने के बाद धन धान्य में वृद्धि होती है।
3 परिवार में मांगलिक कार्य शुरू हो जाते है।
4 शादी में आ रही रूकावट दूर होती है।
5 पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। परिवार में सुख शांति होती है।


ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा

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