कुंडली में विदेश के योग कैसे बनते है

Date : 2023-05-04

कुंडली में विदेश के योग कैसे बनते है


१ बारवे स्थान का मालिक आठवे स्थान में मित्र राशि या उच्च राशि में हो तो विदेश के योग बनते है।

२ लग्नेश से बारवे स्थान में उच्च का या स्वराशि का ग्रह बैठा हो तो भी विदेश के योग बनते है।

३ नोवे स्थान का मालिक बारवे स्थान पर हो तो भी विदेश के योग बनते है।

४ बारवे स्थान का मालिक नोवे स्थान में हो तो भी विदेश जाने के योग बनते है।

५ नोवे स्थान और बारवे स्थान का मालिक कुंडली में एक साथ किसी भी स्थान में बैठे हो तो भी विदेश के योग बनते है।

६ बारवे स्थान में उच्च का चन्द्रमा बैठा हो तो भी विदेश के योग बनते है।

७ बारवे स्थान में उच्च का शुक्र होने पर भी विदेश के योग बनते है।

८ लग्नेश कुंडली में यदि बारवे स्थान में बैठा हो तो भी विदेश के योग बनते है।

९ चौथे स्थान और बारवे स्थान के मालिक एक साथ बारवे स्थान में बैठे हुए हो तो भी विदेश में सेटल होने के योग बनते है।

१० तीसरे स्थान का मालिक अष्टम स्थान में हो और अष्टमेश लग्न में हो तो भी विदेश के योग बनते है।

११ बारवे स्थान का मालिक अगर छठे स्थान में बैठा हो तो भी विदेश जाने के योग बनते है।

१२ लग्नेश और बारवे स्थान के मालिक के बीच स्थान परिवर्तन योग होने पर भी विदेश के योग बनते है।

१३ लग्नेश, द्वादशेश और भाग्येश के बीच सम्बन्ध बनने पर भी विदेश के योग बनते है।

१४ लग्नेश और नवमेश के बीच स्थान परिवर्तन होने पर भी विदेश के योग बनते है।

१५ लग्नेश से द्वादश केंद्र या त्रिकोण में बलि हो अर्थात उच्च, मित्र, या स्वराशि का हो। और उसके दोनों तरफ शुभ ग्रह स्थित हो तो भी विदेश के योग बनते है।

१६ चन्द्रमा से छठे, आठवे या बारवे स्थान में शुक्र स्थित हो तो विदेश के योग बनते है।

१७ सप्तमेश और नवमेश में स्थान परिवर्तन होने पर भी विदेश के योग बनते है।

१८ नवमेश लग्न में हो और चथुर्तेश आठवे या बारवे स्थान में हो तो भी विदेश के योग बनते है।

१९ षष्टेश और द्वादश में स्थान परिवर्तन हो और साथ ही नवम स्थान भी मजबूत हो तो भी विदेश के योग बनते है।

२० बारवे स्थान में उच्च का राहु भी विदेश के योग बनाता है।

ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा

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