Date : 2023-04-28
कुंडली में पुत्र योग कैसे देखते है
भारतीय संस्कृति में पुत्र का विशेष महत्व बताया गया है क्योकि पुत्र ही वंश को आगे बढ़ाता है इसलिए लोगो को पुत्र की इच्छा अधिक होती है इसलिए लोग पुत्र प्राप्ति के उपाय करते रहते है और कुंडली में पुत्र योग के बारे में पूछते है। इस ब्लॉग में हम कुंडली में मौजूद पुत्र योगो की चर्च करेंगे। कुंडली में ऐसे कौन से योग होते है जिनके कारण पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
कुंडली में पुत्र योग● कुंडली में पांचवा स्थान संतान का होता है और बृहस्पति सूर्य मंगल पुत्र संतान के कारक होते है। इसलिए यदि पंचम भाव या पंचम भाव के मालिक पर बृहस्पति की दृष्टि हो तो पुत्र संतान का योग बनता है लेकिन कुंडली में बृहस्पति शनि की दृष्टि या युति से पीड़ित नहीं होना चाहिए। अगर बृहस्पति शनि या राहु द्वारा किसी भी प्रकार से पीड़ित होगा तो पुत्र योग भंग हो जाएगा।
● कुंडली में पांचवे स्थान पर या पांचवे स्थान के मालिक पर मंगल की दृष्टि हो तो भी पुत्र संतान का योग बनता है इस योग में भी बृहस्पति शनि राहु से पीड़ित नहीं होना चाहिए। तभी पुत्र सुख प्राप्त होगा।
● कुंडली में पांचवे स्थान या पांचवे स्थान के मालिक पर सूर्य की दृष्टि हो तो भी पुत्र संतान का योग बनता है लेकिन कुंडली में बृहस्पति शनि राहु से पीड़ित नहीं होना चाहिए।
● कुंडली में पांचवे स्थान का मालिक ग्रह विषम राशियों में होगा तो भी पुत्र संतान का योग बनेगा। शर्त यह रहेगी की कुंडली में बृहस्पति ग्रह शनि राहु से पीड़ित नहीं होना चाहिए।
● कुंडली में दूसरे स्थान पर बृहस्पति ग्रह की दृष्टि होगी या दूसरे स्थान के मालिक ग्रह पर बृहस्पति ग्रह की दृष्टि होगी तो भी पुत्र संतान का योग बनेगा। पुत्र सुख प्राप्त होगा।
● कुंडली में दूसरा स्थान वंश वृद्धि का होता है इसलिए कुंडली में दूसरे स्थान का मालिक ग्रह विषम राशि में होगा तो पुत्र संतान का योग बनेगा।
● कुंडली में दूसरे स्थान का मालिक ग्रह सूर्य मंगल या बृहस्पति से सम्बन्ध बनाएगा तब भी पुत्र संतान का योग बनेगा। पुत्र सुख प्राप्त होगा।
● कुंडली में ग्यारवे स्थान में बृहस्पति होने पर पुत्र संतान का योग बनता है। पुत्र सुख प्राप्त होता है। वंश वृद्धि के योग बनते है।
● कुंडली में ग्यारवे स्थान में सूर्य होने पर पुत्र संतान का योग बनता है। पुत्र सुख प्राप्त होता है। वंश वृद्धि के योग बनते है।
● कुंडली में ग्यारवे स्थान में मंगल होने पर पुत्र संतान का योग बनता है। पुत्र सुख प्राप्त होता है। वंश वृद्धि के योग बनते है।
● कुंडली में लग्न में बृहस्पति होने पर पुत्र संतान का योग बनता है और पुत्र सुख प्राप्त होता है वंश वृद्धि होती है लेकिन कुंडली में बृहस्पति शनि राहु द्वारा किसी भी प्रकार से पीड़ित नहीं होना चाहिए।
● कुंडली में आठवे स्थान में बृहस्पति होने पर भी पुत्र संतान का योग बनेगा। पुत्र सुख प्राप्त होगा। वंश वृद्धि होगी।
पुत्र प्राप्ति के उपाय● प्रत्येक वीरवार व्रत करे। प्रतिदिन सुबह बृहस्पति के मंत्र की एक माला का जाप जरूर करे ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः।
● प्रतिदिन सुबह सूर्य आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करे।
● राहु केतु की शांति के लिए प्रतिदिन सुबह पक्षियों को सतनाज जरूर खिलाए।
● प्रत्येक शनिवार शनि देव पर सरसो का तेल चढ़ाए।
● संतान गोपाल मंत्र का जाप करे। ऊं देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते । देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा