Date : 2022-02-23
सूर्य चन्द्रमा के कुंडली में एक साथ बैठने से अमावस्या दोष का निर्माण होता है जिस स्थान पर सूर्य चन्द्रमा साथ बैठते है तो उस स्थान से जुड़े शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं होते है और उस स्थान से जुडी समस्या रहती है। सूर्य चन्द्रमा के साथ बैठने से सूर्य और चन्द्रमा दोनों ही कमजोर हो जाते है और अपने अपने शुभ फल देने में असमर्थ होते है। कुंडली के बारह भावो में सूर्य चन्द्रमा अमावस्या दोष के फलो पर इस ब्लॉग में चर्चा करेंगे।
लग्न अर्थात प्रथम भाव में सूर्य चन्द्रमा साथ हो तो अमावस्या दोष बनता है लग्न में सूर्य चन्द्रमा के साथ होने के कारण स्वास्थ्य कमजोर रहता है मन परेशान और उदास रहता है। डिप्रेशन की स्थिति रहती है। सूर्य की महादशा आने पर बाल झड़ने की समस्या हो सकती है। सूर्य चन्द्रमा की दृष्टि सप्तम भाव पर रहेगी। सप्तम भाव मैरिड लाइफ का होता है इसलिए इस स्थिति में मैरिड लाइफ में भी समस्या रहेगी। शादी देर से होती है और शादी के बाद पति पत्नी के बीच मतभेद की स्थिति रहती है।
कुंडली में दूसरे स्थान में सूर्य चन्द्रमा हो तो धन हानि के योग बनते है धन संचय में कमी रहती है खर्चे अधिक होते है व्यर्थ के खर्चे लगे रहते है धन जमा करने में समस्या रहती है पारिवारिक सुख में कमी रहती है। आंखे कमजोर होने के योग बनते है गले में इन्फेक्शन की समस्या हो हो सकती है वाणी दोष के योग बनते है।
कुंडली के तीसरे स्थान में सूर्य चन्द्रमा साथ होने पर भाई बहनो से सम्बंधित समस्या होती है। मेहनत के अनुसार फल की प्राप्ति नहीं होती है मेहनत व्यर्थ हो जाती है पराक्रम और हिम्मत में कमी रहती है। पड़ोसियों से मतभेद रहते है अच्छे पड़ोसी नहीं होती है। कान में परेशानी हो सकती है। भाग्य में रूकावट रहेगी।
कुंडली के चौथे स्थान में सूर्य चन्द्रमा साथ होने पर प्रॉपर्टी से जुडी समस्या होती है अपना स्वयं का मकान बनने में देरी होती है वेहिकल सुख प्राप्त होने में भी देरी होती है माता का स्वास्थ्य कमजोर रहता है मन परेशान और उदास रहता है। कार्य क्षेत्र में भी परेशानी रहती है। जन्म स्थान से दूर रहने के योग बनते है।
कुंडली के पंचम भाव में सूर्य चन्द्रमा की युति होने पर हायर एजुकेशन में रूकावट आती है पढ़ाई पूरी होने में रूकावट रहती है। संतान सुख प्राप्त होने में देरी होती है लव अफेयर में सफलता प्राप्त नहीं होती है। पेट और पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या होती है। संतान को मानसिक समस्या होती है। मित्रो से मतभेद रहते है मित्रो से परेशानी रहती है।
कुंडली के छठे स्थान में सूर्य चन्द्रमा हो तो कर्ज की स्थिति बनती है कर्जा हो जाता है वाद विवाद और लड़ाई झगड़े के योग बनते है। स्वास्थ्य कमजोर रहता है डिप्रेशन, कोल्ड, कफ, चेस्ट इन्फेक्शन की सम्भावना रहती है। मामा और मौसी के सुख में कमी रहती है। शत्रु बनने के योग बनते है।
कुंडली के सातवे स्थान में सूर्य चन्द्रमा होने पर शादी देर से होती है और शादी के बाद पति पत्नी के बीच मतभेद और झगड़े की स्थिति बनती है। पार्टनरशिप में बिज़नेस करने पर नुकसान होता है। पार्टनरशिप में बिज़नेस सफल नहीं होता है।
कुंडली के आठवे स्थान में सूर्य चन्द्रमा की युति होने पर धन हानि होती है अचानक बड़ी मात्रा में धन हानि होती है पाइल्स की समस्या हो सकती है। कोल्ड, कफ, खांसी की समस्या होती है आंखे कमजोर हो सकती है। डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। लाइफ पार्टनर को आँखों में समस्या हो सकती है।
कुंडली के नोवे स्थान में सूर्य चन्द्रमा की युति होने पर भाग्य में रूकावट रहती है मेहनत के अनुसार भाग्य का साथ प्राप्त नहीं होता है प्रत्येक कार्य में रूकावट रहती है लाइफ में तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है। कमर में दर्द की समस्या हो सकती है। व्यर्थ की भागदौड़ अधिक होती है।
कुंडली के दसवे स्थान में सूर्य चन्द्रमा की युति होने पर करियर में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है करियर में संघर्ष अधिक होता है। करियर को लेकर मानसिक तनाव बना रहता है। मान सम्मान भी पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं होता है।
कुंडली के ग्यारवे स्थान में सूर्य चन्द्रमा की युति होने पर धन लाभ में कमी रहती है इनकम अच्छी नहीं होती है बड़े भाई बहन के सुख में कमी रहती है। उनसे सपोर्ट प्राप्त नहीं होता है। धन की समस्या रहती है। मित्रो से मतभेद और धोखे के योग बनते है।
कुंडली के बारवे स्थान में सूर्य चन्द्रमा की युति होने पर व्यर्थ में धन हानि होती है उल्टी आंख में परेशानी हो सकती है। रात को देर से नींद आने की समस्या होती है। वाद विवाद के योग बनते है जुए, सट्टे में पैसे बर्बाद होते है। बीमारियों पर खर्चे अधिक होते है।
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा
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