कुंडली में अशुभ योगो के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए और ग्रहो के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए रत्न धारण किये जाते है लेकिन रत्न काफी महंगे होते है। लेकिन रुद्राक्ष रत्नो के तुलना में काफी सस्ते होते है और असरकारक भी होते है। रुद्राक्ष धारण करने से अशुभ ग्रहो के दुष्प्रभाव कम हो जाते है और ग्रहो के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है। किस ग्रह के लिए कौन सा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
- सूर्य के लिए एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सूर्य के शुभ फल प्राप्त होंगे। अगर कुंडली में सूर्य पीड़ित है तो एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सूर्य के अशुभ फल समाप्त होंगे और सूर्य के शुभ फल में वृद्धि होगी।
- चन्द्रमा के लिए दो मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से चन्द्रमा के शुभ फल प्राप्त होंगे। अगर कुंडली में चन्द्रमा पीड़ित है तो दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से चन्द्रमा के अशुभ फल समाप्त होंगे और चन्द्रम के शुभ फल में वृद्धि होगी। दो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। मानसिक तनाव की समस्या दूर हो जाती है।
- मंगल ग्रह के लिए तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मंगल ग्रह के शुभ फलो में वृद्धि होती है। तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से पराक्रम और हिम्मत में वृद्धि होती है। अगर कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर है तो तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते है और मंगल ग्रह के शुभ फल प्राप्त होते है।
- बुध ग्रह के लिए चार मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से बुध ग्रह के शुभ फलो में वृद्धि होगी। अगर कुंडली में बुध किसी भी प्रकार से पीड़ित है तो चार मुखी रुद्राक्ष धारण करने से बुध ग्रह के अशुभ फल समाप्त होंगे और बुध ग्रह के शुभ फल प्राप्त होंगे।
- बृहस्पति ग्रह के लिए पंचम मुखी या दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। पांच मुखी या दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से बृहस्पति ग्रह के शुभ फल प्राप्त होते है और बृहस्पति ग्रह के शुभ फलो में वृद्धि होती है बृहस्पति ग्रह अगर कुंडली में पीड़ित है तो पांच मुखी रुद्राक्ष या दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से बृहस्पति ग्रह के अशुभ फल समाप्त हो जाते है और बृहस्पति ग्रह के शुभ फल प्राप्त होते है।
- शुक्र ग्रह के लिए छह मुखी या तरह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। छह मुखी या तरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शुक्र ग्रह के शुभ फलो में वृद्धि होती है। अगर कुंडली में शुक्र किसी भी प्रकार से कमजोर हो रहा है या पीड़ित हो रहा है तो छह मुखी या तरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शुक्र ग्रह शुभ फल प्रदान करेगा।
- शनि ग्रह के लिए सात मुखी या चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। सात मुखी या चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शनि ग्रह के शुभ फलो में वृद्धि होती है। अगर कुंडली में शनि किसी भी प्रकार से कमजोर हो रहा है या पीड़ित हो रहा है तो सात मुखी या चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से शनि ग्रह शुभ फल प्रदान करेगा।
- राहु ग्रह के लिए आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से राहु ग्रह के शुभ फल प्राप्त होंगे। आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से राहु के अशुभ फल समाप्त होते है। अगर कुंडली में राहु किसी भी प्रकार से कमजोर हो रहा है या पीड़ित हो रहा है तो आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से राहु ग्रह शुभ फल प्रदान करेगा।
- केतु ग्रह के लिए नो मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। नो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से केतु ग्रह के शुभ फल प्राप्त होंगे। नो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से केतु के अशुभ फल समाप्त होते है। अगर कुंडली में केतु किसी भी प्रकार से कमजोर हो रहा है या पीड़ित हो रहा है तो नो मुखी रुद्राक्ष धारण करने से राहु ग्रह शुभ फल प्रदान करेगा।
कुंडली के अशुभ योग जैसे मंगल राहु अंगारक दोष, सूर्य राहु या सूर्य केतु ग्रहण दोष, चंद्र राहु या चंद्र केतु ग्रहण दोष, गुरु राहु या गुरु शनि चांडाल दोष, काल सर्प दोष, केंद्रुम दोष, शनि राहु श्रापित दोष आदि दोषो के लिए रुद्राक्ष धारण करना बहुत लाभदायक रहता है। अगर कुंडली में उपरोक्त दोषो में से कोई भी दोष किसी जातक की कुंडली में है तो उसे रुद्राक्ष धारण करके इन दोषो से मुक्ति प्राप्त हो सकती है इसलिए कुंडली में किसी भी प्रकार का दोष हो तो रुद्राक्ष धारण करना बहुत ही फायदेमंद रहता है।