जानिए, मेष लग्न की कुंडली में बारह भावो में शनि के फल

Date : 2022-12-03

जानिए, मेष लग्न की कुंडली में बारह भावो में शनि के फल

 



मेष लग्न की कुंडली में शनि दसवे स्थान और ग्यारवे स्थान के मालिक होते है दसवा स्थान करियर है और ग्यारवा स्थान धन लाभ का होता है। इस ब्लॉग में आप जान पाएंगे की मेष लग्न की कुंडली में शनि के बारह भावो में क्या फल होते है।


प्रथम भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में प्रथम भाव में शनि नीच के होते है इसके कारण सिर दर्द की समस्या रहती है कार्य क्षेत्र में समस्या रहती है करियर में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है। धन लाभ में कमी रहती है मेहनत के अनुसार अच्छी मात्रा में धन लाभ नहीं होता है ऐसा जातक जिद्दी और आलसी स्वभाव का होता है। व्यर्थ की भागदौड़ अधिक रहती है। पिता से मतभेद की स्थिति रहती है। भाई बहनो से भी मतभेद की स्थिति रहती है।

 

दूसरे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में दूसरे स्थान में शनि होने पर करियर में तरक्की प्राप्त होती है। धन लाभ होता है अच्छी इनकम प्राप्त होती है। धन संचय में वृद्धि होती है। लेकिन प्रॉपर्टी बनने में देरी और रुकावट के योग बनते है नशा करने के योग बनते है माता से मतभेद रहते है। जन्म स्थान छूटने के योग बनते है।

 

तीसरे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में तीसरे स्थान में शनि होने पर करियर में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रुकावट रहती है। मेहनत के अनुसार कार्य क्षेत्र में लाभ नहीं होता है और मेहनत के अनुसार इनकम होने में रूकावट रहती है। भाग्य उदय में भी रूकावट रहती है। मेहनत के अनुसार भाग्य का साथ प्राप्त नहीं होता है। संतान प्राप्त होने में भी देरी होती है। मित्रो से सहयोग प्राप्त नहीं होता है पढ़ाई में भी रूकावट आती है। प्लानिंग सफल होने में रूकावट आती है। खर्चे अधिक होते है। विदेश से लाभ के योग बनते है।

 

चौथे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में चौथे स्थान में शनि होने के कारण कार्य क्षेत्र में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है। इनकम का फ्लो भी रुक जाता है अच्छी इनकम होने में रूकावट रहती है अपना स्वयं का मकान बनने में देरी होती है लेकिन मकान बन जाता है। माता से मतभेद की स्थिति रहती है। कार्यो में रूकावट आती है। वाद विवाद के योग बनते है शत्रु होते है। स्वास्थ्य कमजोर रहता है। संघर्ष के बाद कार्य क्षेत्र में सफलता के योग बनते है।

 

पांचवे भाव में शनि

संतान प्राप्ति में देरी होती है। पुत्री संतान होने के योग बनते है। शादी में देरी होती है। लाभ में रूकावट आती है। व्यर्थ के खर्चे अधिक होते है परिवार वालो से बनती नहीं है। आंखे कमजोर होने के योग बनते है। धन संचय में कमी रहती है। वाणी दोष होता है। कड़वी वाणी होती है। नशा करने के योग बनते है। कार्य क्षेत्र में स्थिरता नहीं होती है। इनकम में वृद्धि होने में रूकावट रहती है कार्य स्थल पर सीनियर के साथ अच्छे सम्बन्ध नहीं होते है।

 

छठे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में छठे स्थान में शनि होने पर कार्य क्षेत्र में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है। कर्ज के योग बनते है शत्रु होते है लेकिन शत्रु समाप्त हो जाते है। व्यर्थ के खर्चे अधिक होते है। छोटे भाई बहन और पड़ोसियों से विवाद रहते है। व्यर्थ की भागदौड़ अधिक रहती है। अचानक धन हानि की सम्भावना रहती है। रात को देर से नींद आने की समस्या हो सकती है। बड़े भाई बहनो से भी मतभेद की स्थिति रहती है।

 

सातवे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में सातवे स्थान में शनि होने के कारण बिज़नेस में उन्नति होती है उच्च पद प्राप्त होने के योग बनते है शादी के बाद करियर में तरक्की के योग बनते है और धन में वृद्धि होती है। अच्छे आर्थिक रूप से संपन्न परिवार में विवाह होता है। अच्छी इनकम होती है। सिर में दर्द की समस्या रहती है। मेहनत के अनुसार भाग्य में थोड़ी रूकावट रहती है। प्रॉपर्टी बनने में देरी होती है माता से मतभेद रहते है।

 

आठवे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में आठवे स्थान में शनि होने के कारण कार्य क्षेत्र में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है अच्छी इनकम होने में रूकावट रहती है व्यर्थ के खर्चे अधिक होते है परिवार वालो से बनती नहीं है। आंखे कमजोर होने के योग बनते है। धन संचय में कमी रहती है। वाणी दोष होता है। कड़वी वाणी होती है। नशा करने के योग बनते है। कर्ज की सम्भावना रहती है। संतान सुख देर से प्राप्त होता है। पढ़ाई में रूकावट आती है मित्रो से सहयोग प्राप्त नहीं होता है। प्लानिंग सफल होने में रूकावट रहती है।

 

नोवे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में नोवे स्थान में शनि होने के कारण करियर में तरक्की के योग बनते है अच्छी इनकम होती है। बिज़नेस में तरक्की प्राप्त होने के योग बनते है। छोटे भाई बहन और पड़ोसियों से विवाद रहते है। कर्ज के योग बनते है शत्रु होते है स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है। वाद विवाद के योग बनते है।

 

दसवे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में दसवे स्थान में शनि होने पर बिज़नेस करने के योग बनते है बिज़नेस में तरक्की प्राप्त होने के योग बनते है अगर नौकरी करते है तो नौकरी में उच्च पद प्राप्त होने के योग बनते है अच्छी इनकम होने के योग बनते है। खर्चे अधिक होने के योग बनते है उल्टी आंख कमजोर हो सकती है शादी देर से होती है। अपना स्वयं का मकान बनने में देरी और रूकावट के योग बनते है जन्म स्थान छूटने के योग बनते है माता से मतभेद की स्थिति रहती है।

 

ग्यारवे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में ग्यारवे स्थान में शनि होने के कारण कार्य क्षेत्र में तरक्की प्राप्त होती है। धन लाभ होता है अच्छी इनकम होती है। संतान प्राप्ति में देरी और रूकावट के योग बनते है। पुत्री संतान का योग बनता है। पढ़ाई में रूकावट आती है। लव अफेयर में सफलता प्राप्त नहीं होती है लव अफेयर टूटने के योग बनते है। प्लानिंग सफल नहीं होती है। अचानक धन हानि के योग बनते है बड़े भाई बहनो से सपोर्ट प्राप्त होता है। कार्य बनने में देरी होती है।

 

बारवे भाव में शनि

मेष लग्न की कुंडली में बारवे स्थान में शनि होने पर कार्य क्षेत्र में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रूकावट रहती है खर्चे अधिक होते है आय से अधिक खर्चे होते है। धन संचय में कमी रहती है परिवार से मतभेद के योग बनते है। नशा करने के योग बनते है कड़वी वाणी होती है आंखे कमजोर हो जाती है। लड़ाई झगड़े और वाद विवाद के योग बनते है। स्वास्थ्य पर धन खर्च होता है। भाग्य में रूकावट रहती है। विदेश से लाभ होता है।

 


ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा

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