जानिए राहु ग्रह के बारे में

Date : 2023-03-03

जानिए राहु ग्रह के बारे में



राहु एक पाप ग्रह है राहु का कोई सिर नहीं है ज्योतिष शास्त्र में राहु काल को अशुभ माना जाता है। राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते है। राहु ग्रह का अपना स्वतंत्र कोई प्रभाव नहीं होता है राहु जिस ग्रह के साथ बैठता है या जिस राशि में बैठता है उसके अनुसार राहु फल प्रदान करता है। राहु ग्रह वाद विवाद और कोर्ट केस और जेल के कारक भी होते है इसलिए यदि राहु का सम्बन्ध कुंडली में छठे स्थान या छठे स्थान के मालिक से बन जाए और कुंडली में शनि ग्रह भी पीड़ित हो तो कोर्ट केस, वाद विवाद के योग बनते है और यदि कुंडली में राहु का सम्बन्ध बारवे स्थान के मालिक से साथ बन जाए तो जेल तक जाने की स्थिति बन सकती है। राहु ग्रह का सम्बन्ध कुंडली के बारवे स्थान या बारवे स्थान के मालिक से बनता है तो ऐसे व्यक्ति को नींद से जुडी समस्या होती है रात को देर से नींद आती है और रात को डरावने सपने भी ऐसे व्यक्ति को आते है। व्यर्थ में धन हानि भी होती है धन का नुकसान होता है वजन बढ़ने के योग भी बनते है।



राहु ग्रह अशुभ स्थिति होने से व्यक्ति को शारीरिक समस्याएं भी हो सकती हैं। पीड़ित राहु व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। राहु ग्रह के अशुभ परिणाम के फलस्वरूप शारीरिक और आर्थिक समस्या भी उत्पन्न होने की स्थिति बन जाती है। यदि राहु का सम्बन्ध धन भाव या धन भाव के मालिक ग्रह से होता है तो धन हानि के योग बनते है धन व्यर्थ में खर्च होने के योग बनते है धन संचय में कमी रहती है आर्थिक स्थिति कमजोर रहती है। यदि कुंडली में राहु का सम्बन्ध दूसरे स्थान या दूसरे स्थान के मालिक से बनता है तो व्यक्ति नशा करता है और धूम्रपान करता है। ऐसे व्यक्ति के अपने परिवार से सम्बन्ध अच्छे नहीं होते है परिवार में अलगाव की स्थिति बनती है। गले और मुख में इन्फेक्शन की समस्या ऐसे व्यक्ति को होती है। ऐसा व्यक्ति जुए, सट्टे, लॉटरी में धन का नुकसान करता है। ऐसे व्यक्ति की वाणी अच्छी नहीं होती है ऐसा व्यक्ति दुसरो की चुगली अधिक करता है और अपशब्दों का प्रयोग करता है।

राहु कुंडली में धनु राशि में नीच का होता है इसलिए धनु राशि में राहु होने पर राहु के दुष्प्रभाव प्राप्त होते है। राहु मिथुन राशि में उच्च का होता है इसलिए मिथुन राशि में राहु होने पर राहु के शुभ फल प्राप्त होते है ऐसे व्यक्ति लाइफ में तरक्की प्राप्त करते है और धन प्राप्त के योग भी बनते है। राहु जब कुंडली में लग्न में बनते है या लग्नेश से सम्बन्ध बनाता है तो ऐसा व्यक्ति गलत संगत में रहना पसंद करता है ऐसे व्यक्ति को गलत संगत पसंद होती है और वो नशा भी करता है गलत गतिविधियों में रहता है और ऐसा व्यक्ति चालाक, धूर्त और कपटी भी होता है। ऐसे व्यक्ति के प्रत्येक कार्यो में रूकावट आती है भाग्य में रूकावट रहती है ऐसे व्यक्ति को भाग्य का साथ प्राप्त नहीं होता है


राहु जब कुंडली में पंचम भाव और पंचम भाव के मालिक से सम्बन्ध बनाता है तो ऐसे व्यक्ति को हायर एजुकेशन में रूकावट आती है। पढ़ाई में मेहनत के अनुसार रिजल्ट प्राप्त नहीं होते है। ऐसे व्यक्ति के अच्छे मित्र नहीं बनते है। मित्रो से मतभेद और धोखे के योग बनते है ऐसे व्यक्ति को लव अफेयर में भी सफलता प्राप्त नहीं होती है लव अफेयर टूट जाते है। संतान भी देर से होती है संतान से भी सम्बन्ध अच्छे नहीं होते है। संतान सुख प्राप्त होने में रूकावट आती है। पेट और पाचन क्रिया भी ऐसे व्यक्ति की ज्यादा अच्छी नहीं होती है ऐसे व्यक्ति को पेट में कीड़े पड़ जाते है।


राहु जब कुंडली में सप्तम भाव या सप्तम भाव के मालिक से सम्बन्ध बनाता है तो ऐसे व्यक्ति की शादी में देरी होती है और शादी के बाद मैरिड लाइफ में समस्या रहती है। पार्टनरशिप में ऐसे व्यक्ति को नुकसान होता है पार्टनरशिप में धोखा होता है। प्रत्येक कार्य में रूकावट आती है पार्टनरशिप में वाद विवाद के योग बनते है पार्टनर के साथ सम्बन्ध अच्छे नहीं होते है। शादी भी चलने में समस्या आती है। धन लाभ में रूकावट आती है। धन लाभ में कमी रहती है। बनते हुए कार्यो में रूकावट आती है।


राहु जब चौथे स्थान और चौथे स्थान के मालिक से सम्बन्ध बनाता है तो प्रॉपर्टी से जुडी समस्या रहती है अपना स्वयं का मकान बनने में देरी और रूकावट के योग बनते है प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने में धोखा होने के योग बनते है माता से सम्बन्ध अच्छे नहीं होते है माता से वैचारिक मतभेद होते है। ऐसे व्यक्ति का मन परेशान और बेचैन रहता है। करियर में भी समस्या रहती है कार्य क्षेत्र में स्थिरता और तरक्की प्राप्त होने में रूकावट आती है। जन्म स्थान छूटने के योग बनते है जन्म स्थान से दूर सफलता प्राप्त होने के योग बनते है।


राहु के उपाय

* राहु की शांति के लिए प्रतिदिन सुबह पक्षियों को सतनाज खिलाए। इससे राहु की शांति होती है।

* राहु की शांति के लिए प्रत्येक महीने की अमावस्या को कुष्ट रोगियों को घर का बना भोजन खिलाए।

* राहु की शांति के लिए प्रतिदिन शाम के समय राहु के बीज मंत्र का जाप करे ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।

* ज्योतिषी को कुंडली दिखाकर गोमेद रत्न धारण करे।

* दुर्गा चालीसा का पाठ करें। इससे भी राहु ग्रह की शांति होती है।
 
* भगवान शिव और श्री हरि विष्णु की पूजा करना चाहिए।



ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा

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