Date : 2022-08-12
somvar vrat ki katha ( सोमवार व्रत की कथा ) : प्राचीन समय में किसी शहर में एक धनी साहूकार रहता था। उसके घर में किसी चीज की कमी नहीं थी सिर्फ उसको एक ही दुख था की उनको कोई औलाद नहीं थी। वह संतानहीन था। पुत्र प्राप्ति की इच्छा से साहूकार हर सोमवार को व्रत रखता और भगवान शिव की पूजा करता था।एक दिन साहूकार सोमवार के दिन शिवजी की पूजा कर रहा था और माता पार्वती और शिवजी वहां से गुजर रहे थे। उसकी पूजा से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा की प्रभु आप अपने भक्त की इच्छा पूरी क्यों नहीं करते। भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि ये संसार एक कर्मक्षेत्र है और इस संसार में सबको अपने भाग्य के अनुसार ही मिलता है। ये बात सुनकर माता पार्वती जी ने कहा की प्रभु अगर आप अपने भक्तो की मनोकामनाए पूरी नहीं करेंगे तो कोई भक्त आपकी पूजा क्यों करेगा पार्वती जी के इस वचन को सुनकर शंकर जी ने साहूकार को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दे दिया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि साहूकार का पुत्र केवल 12 वर्षों तक की जीवित रह सकता है इससे अधिक में साहूकार के लिए कुछ नहीं कर सकता है। ये बात साहूकार सुन रहा था इसलिए उसने अपने पुत्र की बारह वर्ष की आयु जानकार न तो कोई ख़ुशी प्रकट की और न ही कोई दुख प्रकट किया। वह पहले की तरफ शिवजी की पूजा करता रहा और कुछ दिन बाद उसकी पत्नी गर्भवती हो गई है उसने दसवे महीने में एक सुन्दर पुत्र को जन्म दिया लेकिन साहूकार ने अपने पुत्र की बारह वर्ष की उम्र जानकार कोई ख़ुशी प्रकट नहीं की और न ही किसी को कोई भेद बताया। जब साहूकार का पुत्र पुत्र के 11 साल का हो गया तो साहूकार की पत्नी से अपने पुत्र के विवाह के लिए साहूकार से कहा लेकिन साहूकार ने कहा की अभी में इसे कशी जी पढ़ने भेजूंगा। साहूकार ने अपने साले को बुलाकर कहा की तुम इसे कशी जी ले जाओ और विधिवत शिक्षा ग्रहण कराओ। साहूकार ने अपने बेटे को खूब सारा धन भी दिया और कहा कि रास्ते में ब्राह्मणों को भोजन, दक्षिणा देना और यज्ञ कराते हुए जाना। अपने पिताजी की आज्ञा का मान रखते हुए साहूकार का बेटा और मामा रास्ते में यज्ञ कराते हुए और ब्राह्मणों को दान देते हुए काशी के लिए चल दिए।
इस बीच एक नगर में किसी राजा की कन्या का विवाह हो रहा था। अन्य राजा का लड़का बारात लेकर आया था। लेकिन वो राजकुमार एक आँख से काना था इस बात की चिंता करते हुए राजकुमार के पिता ने साहूकार के बेटे और उसके मामा से कहाँ अगर आप शादी का कार्य पूर्ण करवा देंगे तो हम आपको बहुत धन देंगे। साहूकार के बेटे से इस बात को स्वीकार कर लिया और स्वयं दूल्हा बनकर राजकुमारी से शादी कर ले लेकिन वापिस जाते समय साहूकार के बेटे ने चुपके से राजकुमारी की चुनरी पर लिख दिया की तुम्हारा विवाह जिसके साथ हुआ है वो कशी जी जा रहा है और तुम्हे जिसके साथ विदा किया जाएंगे वो एक आँख से काना है राजकुमारी ने जब ये सब लिखा पाया तो उसके उस काने राजकुमार के साथ जाने से मना कर दिया। इस प्रकार काने राजकुमार की बारात वापिस चली गई।
इसके बाद साहूकार का बेटा और मामा काशी पहुंच गए और वहां पढ़ना शुरू किया। एक दिन मामा भेंजे ने यज्ञ का आयोजन रखा हुआ था अचानक लड़के की तबियत ख़राब हो गई है तो उसके मामा ने उसे अंदर जाकर आराम करने को कहा लेकिन कुछ देर बाद लड़का मर गया। जब लड़के के मामा से देखा की लड़का मर चुका है तो उसने रोना प्रारम्भ कर दिया और स्वयं से कहाँ की पहले यज्ञ पूरा कर लू। बाद में सोचुंगा की आगे क्या करना है। संयोग वश माता पार्वती जी और शिवजी वहां से जा रहे थे। माता पार्वती ने देखते ही लड़के को पहचान लिया और भोलेनाथ से इसके मरने का कारण पूछा तो शिवजी ने कहाँ की ये बच्चा अपनी आयु पूर्ण कर चुका है। माता पार्वती जी ने कहाँ प्रभु आप इसे जीवित कर दीजिए नहीं तो इसके माता पिता तड़प तड़प के इसके वियोग में अपने प्राण त्याग देंगे। माता पार्वती के वचन सुनकर शिवजी ने लड़के को जीवित कर दिया। अपनी शिक्षा समाप्त करने के बाद साहूकार का बेटा अपने मामा के साथ फिर से अपने नगर के लिए चल दिया। रास्ते में दोनों उसी से नगर में पहुंचे जहां उसका विवाह राजकुमारी के साथ हुआ था। तब राजकुमारी के पिता ने साहूकार के पुत्र को पहचान लिया और अपने महल ले जाकर उन दोनों की खूब सेवा की। कुछ दिन के बाद अपनी पुत्री को साहूकार के बेटे के साथ विदा किया। साथ में दास दसियो को भी भेजा और धन धान्य भी दिया। जब साहूकार का बेटा अपनी पत्नी के साथ घर पहुंचा तो साहूकार और उसकी पत्नी उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुए। इस प्रकार जो कोई मनुष्य सोमवार का व्रत करता है और कथा पढ़ता है उसकी सभी इच्छाए पूरी हो जाती है और अंत में मृत्यु के बाद शिवलोक में निवास करता है।
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा
2021-02-11
2021-02-12
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