Date : 2022-03-16
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। इस साल होलिका दहन का त्योहार 17 मार्च 2022 को मनाया जाएगा। होलिका दहन 17 मार्च 2022 को मनाया जाएगा और इसका शुभ मुहूर्त है रात 9 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। होलिका दहन की पूजा के लिए आपको सिर्फ 1 घंटे 10 मिनट का ही समय मिलेगा. इसके अगले दिन शुक्रवार 18 मार्च 2022 को रंगवाली होली खेली जाएगी।
होलिका दहन के नियम
- पहला नियम उस दिन भद्रा न हो।
- दूसरा नियम पूर्णिमा प्रदोषकाल व्यापिनी होनी चाहिए अर्थात उस दिन सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्तों में पूर्णिमा तिथि होनी चाहिए।
होलिका दहन की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार पूर्व काल में हिरण्यकश्यप ने जब देखा की उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भगवान के अलावा किसी दूसरे की पूजा नहीं करता है तो उसे इस बात पर बहुत क्रोध आया है और उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुक़सान नहीं पहुँचा सकती लेकिन इसका उल्टा ही परिणाम हुआ होलिका जलकर भस्म हो गयी और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ। इसलिए इस दिन होलिका दहन करने की प्रथा है।
होलिका दहन की पूजन सामग्री
अक्षत्, गंध, गुड़. फूल, माला, रोली, बताशे, कच्चा सूत का धागा, अगरबत्ती, साबुत मुंग, एक लोटे में जल, नारियल, गुलाल, गेहूं की बालियां, हल्दी।
होलिका दहन की पूजा करने का तरीका
इन सभी सामग्री को एक थाली में रखकर पूजा स्थल पर जाए और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें। इसके बाद गणेश जी की पूजा करे क्योकि सबसे पहले प्रत्येक पूजा भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है। इसके बाद होलिका की पूजा करें। इसके बाद प्रह्लाद और नरसिंघ भगवान का पूजन करे इसके बाद बारी-बारी से इनको अक्षत, फूल, रोली आदि अर्पित करते हैं और फिर हनुमान जी और शीतला माता और पितरों की पूजा करते हैं। इसके बाद सात बार परिक्रमा करते हुए होलिका में कच्चा सूत लपेटे। इसके बाद इसके बाद जल अर्पित करें फिर अन्य पूजन सामग्री चढ़ाकर होलिका में अनाज की बालियां डाल दें।
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा
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