दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक अध्याय का पाठ करने से होती है सभी मनोकामनाए पूरी। दुर्गा सप्तशती के पाठ के लाभ क्या होते है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के नियम क्या होते है।

Date : 2022-06-08

दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक अध्याय का पाठ करने से होती है सभी मनोकामनाए पूरी। दुर्गा सप्तशती के पाठ के लाभ क्या होते है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के नियम क्या होते है।


नव रात्रि के दिनों में माँ दुर्गा की पूजा करने के विशेष लाभ होते है। इन दिनों दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बेहद लाभप्रद रहता है। व्रत करने वाले लोगो को नवरात्री में विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ नौ दिनों तक पूरे विधि विधान से किया जाए तो चमत्कारी लाभ प्राप्त होते है। आइये जानते है दुर्गा सप्तशती के विभिन्न अध्यायों से क्या लाभ प्राप्त होता है।

पहला अध्याय : दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय का पाठ करने से सभी प्रकार की चिंताएं दूर होती हैं। मानसिक शांति प्राप्त होती है।

दूसरा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय का पाठ करने से लड़ाई झगड़े, शत्रुओ पर विजय प्राप्त होती है और कोर्ट केस में जीत प्राप्त होती है। कोर्ट केस से मुक्ति प्राप्त होती है।

तीसरा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के तीसरे अध्याय का पाठ करने से दुश्मनो का नाश हो जाता है। दुश्मन समाप्त हो जाते है।

चौथा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के चौथे अध्याय का पाठ करने से दुर्गा माता के दर्शन होने के योग बन जाते है।

पांचवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के पांचवे अध्याय का पाठ करने से भक्ति मिलती है। शांति प्राप्त होती है।

छठा अध्याय : दुर्गा सप्तशती का छठा पाठ करने से सभी प्रकार की बाधाए दूर होती है। दुख, गरीबी और भय आदि दूर होता है।

सातवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। दिल से जो भी इच्छा मांगेगे पूरी होती है।

आठवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के आठवे अध्याय का पाठ करने से धन लाभ होता है और वशीकरण और मित्रता के लिए किया जाता है।

नोवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के नोवे अध्याय का पाठ करने से संतान सुख प्राप्त होता है और कोई हुई चीज़ या व्यक्ति की प्राप्ति होती है।

दसवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के दसवे अध्याय का पाठ करने से भी अच्छी संतान प्राप्ति के योग बनते है। बच्चे को सही रास्ते पर रखने में मदद मिलती है। हर प्रकार की कामना की पूर्ति होती है। नोवे अध्याय के समान ही इसमें भी वही फल मिलते है जो नोवे अध्याय का पाठ करने से मिलते है।

ग्यारवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से व्यापार में तरक्की प्राप्त होती है सभी प्रकार के भौतिक सुख प्राप्त होते है। धन संचय होने लगता है। सुख संपत्ति प्राप्त होती है।

बारवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मान सम्मान की प्राप्ति होती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से धन लाभ के योग बनते है।

तेरहवा अध्याय : दुर्गा सप्तशती के तेरहवे अध्याय का पाठ करने से मोक्ष और भक्ति की प्राप्ति होती है। ये पाठ भक्ति प्राप्ति के लिए विशेष रूप से किया जाता है।


दुर्गा सप्तशती पाठ करने के नियम

- किसी भी पूजा को करने से पहले गणेश भगवान की पूजा की जाती है। इसलिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले गणेश जी की पूजा अवश्य करें।

- दुर्गा सप्तशती का पाठ दुर्गा सप्तशती की पुस्तक को व्यासपीठ या लाल कपड़े पर रखकर करना चाहिए।

- दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय शब्दों का उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए। जल्दबाज़ी में पाठ नहीं करना चाहिए।

- दुर्गा सप्तशती का पाठ शुद्ध होकर करना चाहिए और कुश के आसन या लाल कंबल के आसन पर बैठकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।

- दुर्गा सप्तशती के पाठ के बीच में उठना नहीं चाहिए।

- दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रारम्भ करने से पहले पुस्तक को नमस्कार करे और माता का ध्यान भी करे।

 

ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा

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