Date : 2022-12-06
कुंडली में पांचवा स्थान इष्ट देव का होता है। कुंडली में पांचवे स्थान में जो राशि होती है उस राशि के देवता के अनुसार इष्ट देव का निर्धारण होता है। कुल बारह लग्न की कुंडलियां होती है और प्रत्येक कुंडली में अलग अलग इष्ट देव होते है। इस ब्लॉग में आज हम बात करेंगे तो मेष से लेकर मीन लग्न की कुंडली में इष्ट देव को कैसा पहचाने।
कुंडली के अनुसार इष्ट देव की पहचान
मेष लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान सिंह राशि होती है इसलिए मेष लग्न वालो के इष्ट देव सूर्य भगवान होते है। इसलिए मेष लग्न वालो को सूर्य भगवान की पूजा करनी चाहिए। सूर्य भगवान की पूजा करने से मेष लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। उनकी लाइफ में चल रही समस्याए समाप्त होंगी। लाइफ में तरक्की के योग बनेंगे। मान सम्मान में वृद्धि होगी। अच्छी संतान प्राप्त होगी।
वृष लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में कन्या राशि होती है जिसके देवता गणेश भगवान है इसलिए वृष लग्न वालो के इष्ट देव गणेश भगवान है। इसलिए वृष लग्न वालो को गणेश भगवान की पूजा करनी चाहिए। गणेश भगवान की पूजा करने से वृष लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। उनकी लाइफ में चल रही समस्याए समाप्त होंगी। लाइफ में तरक्की के योग बनेंगे। उनके धन में वृद्धि होगी। पारिवारिक सुख में वृद्धि होगी।
मिथुन लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान तुला राशि होती है। जिसका सम्बन्ध माता लक्ष्मी से होता है इसलिए मिथुन लग्न वालो के इष्ट माता लक्ष्मी है। इसलिए मिथुन लग्न वालो को माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी माता की पूजा करने से मिथुन लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। धन संपत्ति में वृद्धि होगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पारिवारिक सुख में वृद्धि होगी।
कर्क लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में वृश्चिक राशि होती है जिसके देवता हनुमान जी होते है इसलिए कर्क लग्न वालो के इष्ट देव हनुमान जी है। इसलिए कर्क लग्न वालो को प्रतिदिन हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान जी की पूजा करने से कर्क लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। लाइफ में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी।
सिंह लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में धनु राशि होती है जिसके देवता भगवान विष्णु है। इसलिए सिंह लग्न वालो के इष्ट देव भगवान विष्णु है। इसलिए सिंह लग्न वालो को प्रतिदिन सुबह भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा करने से सिंह लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। लाइफ में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी।
कन्या लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में मकर राशि होती है इसलिए कन्या लग्न वालो के इष्ट देव शंकर भगवान होते है। इसलिए कन्या लग्न वालो को प्रतिदिन शंकर भगवान की पूजा करनी चाहिए। भगवान शंकर की पूजा करने से कन्या लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। लाइफ में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी।
तुला लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में कुम्भ राशि होती है इसलिए तुला लग्न वालो के इष्ट देव शंकर भगवान होते है। इसलिए तुला लग्न वालो को प्रतिदिन शंकर भगवान की पूजा करनी चाहिए। भगवान शंकर की पूजा करने से तुला लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। लाइफ में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी।
वृश्चिक लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में मीन राशि होती है जिसका सम्बन्ध भगवान विष्णु है। इसलिए वृश्चिक लग्न वालो के इष्ट देव भगवान विष्णु है। इसलिए वृश्चिक लग्न वालो को प्रतिदिन सुबह भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा करने से वृश्चिक लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। लाइफ में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी।
धनु लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में मेष राशि होती है जिसका सम्बन्ध हनुमान जी है इसलिए धनु लग्न वालो के इष्ट देव हनुमान जी है। इसलिए धनु लग्न वालो को प्रतिदिन हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान जी की पूजा करने से धनु लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। लाइफ में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी।
मकर लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में वृष राशि होती है। जिसका सम्बन्ध माता लक्ष्मी से होता है इसलिए मकर लग्न वालो के इष्ट माता लक्ष्मी है। इसलिए मकर लग्न वालो को माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी माता की पूजा करने से मकर लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। धन संपत्ति में वृद्धि होगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पारिवारिक सुख में वृद्धि होगी।
कुम्भ लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान मिथुन राशि होती है। जिसके देवता गणेश भगवान है इसलिए कुम्भ लग्न वालो के इष्ट देव गणेश भगवान है। इसलिए कुम्भ लग्न वालो को गणेश भगवान की पूजा करनी चाहिए। गणेश भगवान की पूजा करने से कुम्भ लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। उनकी लाइफ में चल रही समस्याए समाप्त होंगी। लाइफ में तरक्की के योग बनेंगे। उनके धन में वृद्धि होगी। पारिवारिक सुख में वृद्धि होगी।
मीन लग्न की कुंडली में पांचवे स्थान में कर्क राशि होती है इसलिए मीन लग्न वालो के इष्ट देव शंकर भगवान होते है। इसलिए मीन लग्न वालो को प्रतिदिन शंकर भगवान की पूजा करनी चाहिए। भगवान शंकर की पूजा करने से मीन लग्न वालो की इच्छाए पूरी होंगी। लाइफ में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे। कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी। सुख सौभाग्य में वृद्धि होगी।
ज्योतिषाचार्य : महेश शर्मा
2021-02-11
2021-02-12
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